हमें सभी प्रकार के दुःखों से हीन स्वर्ग में पहुंचाओ

हे इंद्रादि देवो! ग्रामादि सुखों के इच्छुक इस पुरुष के अधिकार में सूर्य, अग्नि, चंद्र, स्वर्ग आदि की ज्योति पूर्ण रूप से रहे. इस के कारण शत्रु हमारे अधिकार में रहें. तुम हमें सभी प्रकार के दुःखों से हीन स्वर्ग में पहुंचाओ.

दीर्घ आयु चाहने वाले पुरुष के समीप बैठने के लिए नियुक्त करता हूं

जिस देव के निमित्त पंचयाग किए जाते हैं, वह अग्नि देव; जिन देवों के निमित्त बाद वाले तीन यज्ञ किए जाते हैं, वह इंद्र आदि देव; जो बलि का अपहरण करते हैं, दिशाओं के स्वामी देव हैं, इन सब को एवं इन के अतिरिक्त जो देव हैं, उन को भी में इस दीर्घ आयु चाहने वाले पुरुष के समीप बैठने के लिए नियुक्त करता हूं.

मेरी संतान की एवं मेरे धन की रक्षा करो

हे मणि! मेरी, मेरी संतान की एवं मेरे धन की रक्षा करो. शत्रु हमारा अतिक्रमण न करे अर्थात् हमें पराजित न करे. हमारी हत्या करने के इच्छुक पिशाच आदि हमारी हिंसा न करें.

मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं

हे रोगी पुरुष ! जलों के सहित अग्नि तेरे लिए सुखकर हो. सभी जड़ीबूटियों के साथ सोमलता तेरे लिए सुखकारी हो. इसी प्रकार मैं तुझे क्षय, कोढ़ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से एवं वरुण देव के पापों से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी बनें.

अपने घूमनेफिरने के प्रदेश में पराजित करते हैं

अग्नि आदि देवों के द्वारा दी हुई एवं सुख देने वाली जंगिड़ मणि से हम विघ्न करने वाले सभी राक्षसों को अपने घूमनेफिरने के प्रदेश में पराजित करते हैं.

दूध एवं घृत आदि यज्ञ सामग्री ले कर आते हैं

यज्ञ करने के इच्छुक जन अपनी माताओं और बहनों के समान जल, सोमरस, दूध एवं घृत आदि यज्ञ सामग्री ले कर आते हैं.

शत्रु सैनिकों का मन कुछ सोचने और निश्चय करने में समर्थ न हो

शिव के धनुष पिनाक के समान शत्रुओं के मारने में सक्षम आयुध धारण करती हुई, खड्ग आदि आयुधों से शत्रुओं को फाड़ती हुई हमारी सेना मारकाट मचाती हुई आगे बढ़े. यदि शत्रु सेना उस का सामना करने के लिए एकत्र हो, तो शत्रु सैनिकों का मन कुछ सोचने और निश्चय करने में समर्थ न हो. ऐसी स्थिति में हमारे शत्रु राष्ट्र, कोश आदि से रहित हो जाएं.

पर्याप्त रूप में आ कर हमें तृप्त करें

हे जल! हम जिस अन्न आदि को पा कर तृप्त होते हैं, उसे प्राप्त करने के लिए हम आप को पर्याप्त रूप में पाएं. हे जल! आप पर्याप्त रूप में आ कर हमें तृप्त करें.

स्त्रियां घरों में अपना धन, वस्त्र आदि छिपा कर रखती हैं

हे स्त्री! मैं तेरे भाग्य को असित, ब्रह्मा, कश्यप एवं गय ऋषियों के मंत्रों से इस प्रकार सुरक्षित करता हूं, जिस प्रकार स्त्रियां घरों में अपना धन, वस्त्र आदि छिपा कर रखती हैं.

शत्रुओं के द्वेषपूर्ण कर्मों से दूर रखो एवं हमारे शत्रुओं का बल नष्ट करो

हे धनुष की निंदनीय डोरी! तुम हमारी ओर न झुक कर हमारे शत्रुओं की ओर झुको. हे देवपति ! हमारे शरीरों को पत्थर के समान सुदृद्ध बनाओ, हमें शत्रुओं के द्वेषपूर्ण कर्मों से दूर रखो एवं हमारे शत्रुओं का बल नष्ट करो.

जो मनुष्य हमें दास बनाना चाहता है, उन अमित्रों को

हमारी जाति का अधिक बली, शत्रु समान शक्ति वाला अथवा निकृष्ट बलशाली जो मनुष्य हमें दास बनाना चाहता है, हमारे उन अमित्रों को, सब को रुलाने वाले संहार कर्ता देव रुद्र अपने बाणों से बींध डालें.

समस्त कार्यों के द्वारा मधु के समान बन कर सब के प्रेम का पात्र बनूं

हे मधु लता ! तुम्हें धारण करने से मेरा निकट गमन दूसरों को प्रसन्न करने वाला हो तथा मेरा दूर गमन दूसरों को प्रसन्न करे. में वाणी से मधुयुक्त हो कर तथा समस्त कार्यों के द्वारा मधु के समान बन कर सब के प्रेम का पात्र बनूं.

जलों में ओषधियां निवास करती हैं

जलों में अमृत है. जलों में ओषधियां निवास करती हैं. इन जलों के प्रभाव से हमारे घोड़े बलवान बनें, हमारी गाएं शक्ति संपन्न बनें.

तृप्त बनो तथा हमारे यज्ञकर्म को संपन्न बनाओ

हे इंद्र ! निचोड़ा गया सोमरस तुम्हारे उदर में प्रवेश करे. तुम इस से अपनी दोनों कोखों को भर लो. तुम हमारा आह्वान सुन कर यहां आओ तथा हमारी स्तुतियां सुनो एवं उन्हें स्वीकार करो. हे इंद्र! तुम इस यज्ञ में अपने मित्र मरुत् आदि देवों के साथ सोमरस पी कर तृप्त बनो तथा हमारे यज्ञकर्म को संपन्न बनाओ.

जादू, टोना, टोटका करने वाले स्त्री-पुरुष अपने मनोरथ में असफल होकर मेरी शरण में आएं

मेरे द्वारा अग्नि आदि देवों को दिया हुआ घृत आदि हवि दुष्ट राक्षसों को यहां से उसी प्रकार दूर हटा दे, जिस प्रकार नदी की धारा फेन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है. मेरे प्रति अभिचार, जादू, टोना, टोटका करने वाले स्त्रीपुरुष अपने मनोरथ में असफल हो कर यहां मेरी शरण में आएं और मेरी स्तुति करें.

उस मित्र के साथ हम सुखी रहें

मुझे दिया हुआ शाप उसी के पास लौट जाए, जिस ने मुझे शाप दिया है. जो पुरुष शोभन हृदय वाला है, उस मित्र के साथ हम सुखी रहें. हम चुगली करने वाले दुष्ट हृदय वाले की आंखों एवं पसली की हड्‌डी को नष्ट करते हैं.

इंद्र ने सोमरस के मद में शत्रुओं को पराजित किया

शत्रु विनाशक एवं समस्त प्राणियों के मित्र इंद्र ने वृत्र राक्षस को आसुरी प्रजाओं के समान मार डाला. जिस प्रकार यज्ञ करते हुए अंगिरा गोत्रीय भृगुओं के यज्ञ का आधार गौ का हरण करने वाले बल नामक असुर को मार डाला था, उसी प्रकार इंद्र ने वृत्र का हनन किया. इंद्र ने सोमरस के मद में शत्रुओं को पराजित किया.

देवों के लिए हम इस भाग में मंत्रों के साथ आहुति देते हैं

पूर्व आदि दिशाओं की रक्षा करने वाले एवं कभी न मरने वाले इंद्र, यम आदि चार देवों के लिए हम इस भाग में मंत्रों के साथ आहुति देते हैं. वे देव सभी प्राणियों के स्वामी हैं.

ऊपर तैरने वाली काई के समान नीचे गिर जाए

हे प्रसव करने वाली नाड़ी! तू इस उदरगत जरायु से पुष्ट नहीं होगी, क्योंकि इस का संबंध मांस, मज्जा आदि से नहीं है. इसलिए उजले रंग की यह जरायु दोनों के ऊपर तैरने वाली काई के समान नीचे गिर जाए. इसे कुत्ते के खाने के लिए नीचे गिर जाने दें.

जो सौभाग्य सूचक चिह्न हैं, वे हमारी संतान को प्राप्त हों

हम ललाट के असौभाग्य सूचक चिह्न को शत्रु के समान अपने शरीर से दूर करते हैं. जो सौभाग्य सूचक चिह्न हैं, वे हमारी संतान को प्राप्त हों. हम ने अपने शरीर से बुरे चिह्न दूर किए हैं, वे हमारे शत्रुओं को प्राप्त हों.

स्वर्ग के समान आनंद तुम्हें यहां भी प्राप्त हो

हे इंद्र ! तुम नवीन के समान सोमरस से अपना पेट उसी प्रकार भर लो जिस प्रकार स्वर्ग अमृत से पूर्ण करते हो. इस निचोड़े गए सोमरस के मद से संबंधित उत्तम स्तुति तथा स्वर्ग के समान आनंद तुम्हें यहां भी प्राप्त हो.

राक्षसों की संतानों के समीप पहुंच कर उन्हें समाप्त कर दो

हे सोमरस पीने वाले अग्नि देव! तुम राक्षसों की संतानों के समीप पहुंच कर उन्हें समाप्त कर दो और हमारी संतान की रक्षा करो. हमारे जो शत्रु तुम से भयभीत हो कर तुम्हारी प्रार्थना करते हैं, तुम उन की दाईं और बाईं दोनों आंखें बाहर निकाल लो.

इस ने मनुष्यों के मध्य अतिशय भाग्य पा लिया है

हे मणि! तेरे प्रभाव से यह पुरुष गृह से युक्त हो कर इस लोक में आ गया है. इस ने जीवित मनुष्यों के समूह को प्राप्त कर लिया है. यह पुत्रों का पिता बन गया है तथा इस ने मनुष्यों के मध्य अतिशय भाग्य पा लिया है.

हम से द्वेष करने वाले शत्रु के हिंसक मन को नष्ट कीजिए

हे परम ऐश्वर्य वाले इंद्र देव ! हम से द्वेष करने वाले शत्रु के हिंसक मन को नष्ट कीजिए. जो शत्रु हमें समाप्त करने का इच्छुक है, उस के आयुध का विनाश करो. हमें महान सुख प्रदान करो एवं मंत्र प्रयोग के कारण असफल न होने वाले शस्त्रों को हम से दूर रखो.

आप की कृपा से हमारे घर में संपत्ति निवास करे

हे देवो! आप सब को त्याग कर मेरे इस यज्ञ में पधारें. इस में आज्य आदि का होम है. हे स्तुतियों द्वारा बढ़ाए जाते हुए देवो! आप इस यजमान की वृद्धि करें. हे देवो! हमारी स्तुतियों को सुन कर प्रसन्न हुए आप की कृपा से हमारे घर में गाय, अश्व आदि पशु एवं अन्य संपत्ति निवास करे.

रोग को त्याग दिया है एवं सुख प्राप्त कर लिया है

हे रोगी पुरुष! तूने शत्रु के समान बाधा पहुंचाने वाले रोग को त्याग दिया है एवं सुख प्राप्त कर लिया है. उत्तम कर्मों के फल के रूप में प्राप्त होने वाले इस कल्याणमय भूलोक में तू स्थित है. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कोढ़, आदि से, रोग का कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, देव, गुरु आदि के द्रोह से एवं वरुण देव के पाप से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

तू यक्ष्मा रोग से छूट गया है

हे रोगी पुरुष! तू यक्ष्मा रोग से छूट गया है. रोग के कारण बने हुए पाप से, निंदा से, द्रोह से, वरुण के पाप से तू छूट गया है. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कोढ़ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से तथा वरुण देव के पाप से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

वृद्धावस्था तक नीरोग रह कर जीवन बिताने योग्य बनाता हूं

हे रोगी पुरुष! में तुझे पूर्व आदि दिशाओं के मध्य वृद्धावस्था तक नीरोग रह कर जीवन बिताने योग्य बनाता हूं. तेरा राजयक्ष्मा आदि रोग एवं पाप देवता निर्मित रोग तुझ से दूर चले जाएं. इसी प्रकार मैं तुझे क्षय, कोढ़ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से एवं वरुण देव के पापों से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

मैं अपने मंत्र के द्वारा तुझे पाप रहित बनाता हूं

हे रोगी पुरुष! ये दिव्य एवं वायु पत्नी पूर्व आदि चारों दिशाएं एवं सब के प्रेरक सविता सभी प्रकार तुम्हें सुखी करें. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कुष्ठ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से तथा वरुण देव के पापों से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र के द्वारा तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.