आकाश में दिखाई देते हुए सूर्य देव हमारे मित्र हों

आकाश में दिखाई देते हुए सूर्य देव हमारे मित्र हों. संपत्ति देने वाले सविता देव हमारे मित्र हों. सविता देव अनेक प्रकार के धनों के स्वामी हैं. वे तथा इंद्र देव हमारे मित्र हैं.

अपने राष्ट्र का स्वामी एवं शत्रुओं को वश में करने वाला बनूं

हे मणि! में तुम्हारे प्रभाव से शत्रुओं का नाशक, प्रजाओं का पालक, अपने राष्ट्र का स्वामी एवं शत्रुओं को वश में करने वाला बनूं, मैं शत्रु सेना के वीरों एवं उन की प्रजाओं पर शासन करने में समर्थ बनूं.

जो हमारे शरीर के नीचे एवं ऊपर के भागों में हैं

तेजस्वी एवं बंधन से छुड़ाने वाले तारे उदित हों. वे तारे पुत्र, पौत्र आदि के शरीर में होने वाले यक्ष्मा, कुष्ठ आदि रोगों एवं उन के फंदों से हमें छुड़ाएं जो हमारे शरीर के नीचे एवं ऊपर के भागों में हैं.

उन तत्त्वों और पदार्थों की दिव्य शक्ति मुझे दें

जो रजोगुण, तमोगुण एवं सतोगुण तीन गुण और पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, तन्मात्रा एवं अहंकार सात पदार्थ दिव्य रूप में सर्वत्र भ्रमण करते हैं, वाणी के स्वामी ब्रह्म उन तत्त्वों और पदार्थों की दिव्य शक्ति मुझे दें.

प्रयोग किए गए मंत्र उस के शाप से मेरी रक्षा करें

जो हमारी जाति का अथवा भिन्न जाति का पुरुष हम से द्वेष रखने के कारण हमें शाप देता है, इंद्र आदि सभी देव उस का विनाश करें, मेरे द्वारा प्रयोग किए गए मंत्र उस के शाप से मेरी रक्षा करें.

राक्षसों के हाथपैर बांध कर उन्हें यहां ले आओ

हे अग्नि ! तुम रस्सी आदि से राक्षसों के हाथपैर बांध कर उन्हें यहां ले आओ. इस के पश्चात इंद्र अपने वज्र से उन के सिर काट दें.

हे दिव्य किरणो, मैं तुम्हारे लिए नमस्कार करता हूं

हे आकाश में जन्म लेने वाली, प्रकाशयुक्त एवं नक्षत्र रूपिणी किरणो! तुम में से जो विश्वावसु गंधर्व अर्थात् चंद्रमा के साथ संयुक्त होती हैं, हे दिव्य किरणो! मैं तुम्हारे लिए नमस्कार करता हूं.

उदर (पेट) में संचित तेरा मूत्र बाहर निकल कर धरती पर गिरे

हम सैकड़ों शक्तियों वाले एवं बाण के पिता सूर्य को जानते हैं. हे रोगी! मैं इसी बाण से तेरे मूत्रादि रोगों को नष्ट करता हूं. उदर (पेट) में संचित तेरा मूत्र बाहर निकल कर धरती पर गिरे.

उसी प्रकार तू जरायु के साथ गर्भ से बाहर आ

हे दशमास गर्भस्थ शिशु ! जिस प्रकार वायु, मन एवं आकाश में उड़ने वाले पक्षी आकाश में बिना रोकटोक के विचरण करते हैं, उसी प्रकार तू जरायु के साथ गर्भ से बाहर आ. जरायु गर्भाशय से नीचे गिरे.

आप आततायियों को दूर फेंक देते हैं

हे पर्जन्य ! विद्युत को मेरा नमस्कार हो. गर्जन करते हुए वज्र को मेरा नमस्कार हो. आप आततायियों को दूर फेंक देते हैं.

वृद्धि प्राप्त करता हुआ यह पुरुष हिरण्य धारण करे

मैं जलों के तेज, ज्योति, ओज और बल तथा वनस्पतियों का वीर्य उसी प्रकार धारण करता हूं, जिस प्रकार इंद्र में इंद्रियों के असाधारण चिह्न वर्तमान हैं. इसीलिए वृद्धि प्राप्त करता हुआ यह पुरुष हिरण्य धारण करे.

ऊपर तैरने वाली काई के समान नीचे गिर जाए

हे प्रसव करने वाली नाड़ी! तू इस उदरगत जरायु से पुष्ट नहीं होगी, क्योंकि इस का संबंध मांस, मज्जा आदि से नहीं है. इसलिए उजले रंग की यह जरायु दोनों के ऊपर तैरने वाली काई के समान नीचे गिर जाए. इसे कुत्ते के खाने के लिए नीचे गिर जाने दें.

राक्षसों की संतानों के समीप पहुंच कर उन्हें समाप्त कर दो

हे सोमरस पीने वाले अग्नि देव! तुम राक्षसों की संतानों के समीप पहुंच कर उन्हें समाप्त कर दो और हमारी संतान की रक्षा करो. हमारे जो शत्रु तुम से भयभीत हो कर तुम्हारी प्रार्थना करते हैं, तुम उन की दाईं और बाईं दोनों आंखें बाहर निकाल लो.

शरीरों को सुख दें एवं हमारी संतान को सुखी बनाएं

हे इंद्र आदि देवो! आप शत्रुओं द्वारा छोड़े जाने वाले आयुधों को हम से दूर करो तथा हमें सुख दो. हे इंद्र आदि देवो! आप हमारे शरीरों को सुख दें एवं हमारी संतान को सुखी बनाएं.

हम मंत्र रूपी वाणी से बुरे लक्षणों का विनाश करते हैं

हे पुरुष! तेरे अपने शरीर, केशों एवं नेत्रों के जो बुरे लक्षण हैं, हम मंत्र रूपी वाणी से उन सभी बुरे लक्षणों का विनाश करते हैं. सविता देव तुझे कल्याण की प्रेरणा दें.

उन्हें भी हम अपने मंत्रों के प्रभाव से दूर करते हैं

हम से संबंधित जो स्त्री हरिण के समान पैरों वाली, बैल के समान दांतों वाली, गाय के समान गति वाली एवं विकृत शब्द बोलने वाली है; हम मंत्रों के प्रभाव से उस के इन दुर्लक्षणों को दूर करते हैं. जिस स्त्री के माथे पर दुर्लक्षणों के प्रतीक उलटे रोम हैं, उन्हें भी हम अपने मंत्रों के प्रभाव से दूर करते हैं.

वेदशास्त्र धारण करने की मुझे बुद्धि दीजिए

हे वाणी के स्वामी ब्रह्म देव! आप दिव्य मन के साथ मेरे समीप आइए. हे प्राण के स्वामी ब्रह्म! इच्छित फल दे कर मुझे आनंदित कीजिए. मेरे द्वारा अध्ययन किए गए वेदशास्त्र धारण करने की मुझे बुद्धि दीजिए.

धन प्रदान करें तथा देव इसे उत्तम ज्योति संपन्न बनाएं

भांतिभांति की धन संपत्ति की कामना करने वाले इस पुरुष को वसु, इंद्र, पूषा, वरुण, मित्र, अग्नि एवं विश्वे देव धन प्रदान करें तथा ये देव इसे उत्तम ज्योति संपन्न बनाएं.

सांपों की ये इक्कीस जातियां देवों के समान बुढ़ापे से रहित हैं

सांपों की ये इक्कीस जातियां देवों के समान बुढ़ापे से रहित हैं एवं नागलोक में निवास करती हैं. इन सांपों की केंचुली जरायु के समान उन से लिपटी रहती है. सांपों की उस केंचुली के द्वारा हम दूसरों का अहित सोचने वाले शत्रुओं की आंखों को ढकते हैं.

मरण पर्यंत अपने पिता के घर रहे

हे सुशोभित सोम ! यह स्त्री पतिव्रता होने के कारण आप के कुल का पालन करने वाली है, इसलिए हम इसे रक्षा के लिए आप को देते हैं. यह तब तक अपने पिता के घर पर रहे. यह धरती पर सिर गिरने तक अर्थात् मरण पर्यंत अपने पिता के घर रहे.

शत्रुओं के द्वेषपूर्ण कर्मों से दूर रखो एवं हमारे शत्रुओं का बल नष्ट करो

हे धनुष की निंदनीय डोरी! तुम हमारी ओर न झुक कर हमारे शत्रुओं की ओर झुको. हे देवपति ! हमारे शरीरों को पत्थर के समान सुदृद्ध बनाओ, हमें शत्रुओं के द्वेषपूर्ण कर्मों से दूर रखो एवं हमारे शत्रुओं का बल नष्ट करो.

रोगों का विनाश करने वाली ओषधि समस्त रोग दूर करे

हे रोगी! तेरे रोग को शांत करने के लिए में बैल जुते हुए हलों को एवं हरण तथा जुए को नमस्कार करता हूं. क्षेत्रीय व्याधियों अर्थात् अतिसार, यक्ष्मा आदि रोगों का विनाश करने वाली ओषधि समस्त रोग दूर करे.

जलोदर रोग वाले पुरुष को रोगमुक्त करता हूं

इंद्रादि देवों में वरुण पापियों को दंड देने वाले हैं. इस प्रकार के यह वरुण सब से उत्कृष्ट हैं. सभी पदार्थ तेजस्वी वरुण देव के वश में हैं. इसलिए मैं वरुण की स्तुति संबंधी मंत्रों से शक्ति प्राप्त कर के वरुण देव के प्रचंड कोप के कारण उत्पन्न जलोदर रोग वाले इस पुरुष को रोगमुक्त करता हूं.

कोई भी इस की हिंसा करने में समर्थ न हो

हे विश्वे देव! वसु एवं आदित्य देवो! दीर्घ आयु की कामना करने वाले इस पुरुष की रक्षा करो एवं दीर्घ आयु की कामना करने वाले इस पुरुष के विषय में सावधान रहो. इस का सजातीय अथवा विजातीय शत्रु इस के पास तक न आ सके. कोई भी इस की हिंसा करने में समर्थ न हो.

बुरे भाग्य वाली स्त्री चिरकाल तक पिता के घर रहे अर्थात् कभी पति का मुख न देखे

मनुष्य जिस प्रकार वृक्ष से माला बनाने हेतु फूल तोड़ता है, उसी प्रकार में इस स्त्री के भाग्य और तेज को स्वीकार करता हूं. धरती में भीतर तक धंसा हुआ पर्वत जिस प्रकार स्थिर रहता है, उसी प्रकार यह बुरे भाग्य वाली स्त्री चिरकाल तक पिता के घर रहे अर्थात् यह कभी पति का मुख न देखे.

रोग को त्याग दिया है एवं सुख प्राप्त कर लिया है

हे रोगी पुरुष! तूने शत्रु के समान बाधा पहुंचाने वाले रोग को त्याग दिया है एवं सुख प्राप्त कर लिया है. उत्तम कर्मों के फल के रूप में प्राप्त होने वाले इस कल्याणमय भूलोक में तू स्थित है. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कोढ़, आदि से, रोग का कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, देव, गुरु आदि के द्रोह से एवं वरुण देव के पाप से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

तू यक्ष्मा रोग से छूट गया है

हे रोगी पुरुष! तू यक्ष्मा रोग से छूट गया है. रोग के कारण बने हुए पाप से, निंदा से, द्रोह से, वरुण के पाप से तू छूट गया है. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कोढ़ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से तथा वरुण देव के पाप से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

वृद्धावस्था तक नीरोग रह कर जीवन बिताने योग्य बनाता हूं

हे रोगी पुरुष! में तुझे पूर्व आदि दिशाओं के मध्य वृद्धावस्था तक नीरोग रह कर जीवन बिताने योग्य बनाता हूं. तेरा राजयक्ष्मा आदि रोग एवं पाप देवता निर्मित रोग तुझ से दूर चले जाएं. इसी प्रकार मैं तुझे क्षय, कोढ़ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से एवं वरुण देव के पापों से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

मैं अपने मंत्र के द्वारा तुझे पाप रहित बनाता हूं

हे रोगी पुरुष! ये दिव्य एवं वायु पत्नी पूर्व आदि चारों दिशाएं एवं सब के प्रेरक सविता सभी प्रकार तुम्हें सुखी करें. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कुष्ठ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से तथा वरुण देव के पापों से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र के द्वारा तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.