गंधर्व पत्नी अप्सराओं को मैं नमस्कार करता हूं

जो किरणें मनुष्य को रुलाने वाली, शक्ति संपन्न, इंद्रियों को निष्क्रिय करने की इच्छुक एवं मन को मोहने वाली हैं, उन गंधर्व पत्नी अप्सराओं को मैं नमस्कार करता हूं.

वह परमात्मा किस प्रकार का है?

वह सूर्यात्मक परमात्मा हमारा पालनकर्ता, जन्मदाता एवं बंधु है. वह स्वर्ग आदि स्थानों एवं वहां प्राप्त होने वाले समस्त प्राणियों को जानता है. एकमात्र वही इंद्र आदि देवों का नाम रखने वाला है अथवा वह स्वयं ही इंद्र आदि नाम धारण करता है. इस प्रकार के परमात्मा को सभी प्राणी यह पूछते हुए प्राप्त होते हैं कि वह परमात्मा किस प्रकार का है?

उन्हें नष्ट करने के लिए उन के समीप चलें

राक्षसों के विनाशक और रोगों को दूर करने वाले अग्नि देव उन्हें नष्ट करने के लिए उन के समीप चलें. अग्नि देव मायामय, सौम्य, हिंसक एवं भयावह रूप धारण करने वाले, दूसरों के दोष खोजने वाले, पीड़ादायक एवं परेशान करने वाले राक्षसों को भस्म करते हुए इस पुरुष के समीप आ रहे हैं.

धन प्रदान करें तथा देव इसे उत्तम ज्योति संपन्न बनाएं

भांतिभांति की धन संपत्ति की कामना करने वाले इस पुरुष को वसु, इंद्र, पूषा, वरुण, मित्र, अग्नि एवं विश्वे देव धन प्रदान करें तथा ये देव इसे उत्तम ज्योति संपन्न बनाएं.

सैकड़ों सामर्थों से संपन्न एवं बाण के पिता वरुण को जानते हैं

हम सैकड़ों सामर्थों से संपन्न एवं बाण के पिता वरुण को जानते हैं. हे रोगी मनुष्य! इसी बाण से मैं तेरे मूत्रादि रोगों को दूर करता हूं. तेरे पेट में रुका हुआ मूत्र बाहर निकल कर धरती पर गिरे.

उसी जल के कारण सभी वृक्ष एवं लताएं जीवित रहती हैं

हे जानने के इच्छुक जनो! इस बात को जानो कि वह जल रूप ब्रह्म पृथ्वी पर नहीं रहता और न वह आकाश में निवास करता है. उसी जल के कारण सभी वृक्ष एवं लताएं जीवित रहती हैं.

दोनों हाथों और दोनों चरणों को सुख प्राप्त हो

मेरे शरीर के अवयव सिर का रोग शांति के रूप में कल्याणकारी हो. मेरे चरण आदि निम्न अंगों को सुख मिले. मेरे दोनों हाथों और दोनों चरणों को सुख प्राप्त हो. मेरे शरीर के मध्य भाग को नीरोगता प्राप्त हो.

स्त्रियां घरों में अपना धन, वस्त्र आदि छिपा कर रखती हैं

हे स्त्री! मैं तेरे भाग्य को असित, ब्रह्मा, कश्यप एवं गय ऋषियों के मंत्रों से इस प्रकार सुरक्षित करता हूं, जिस प्रकार स्त्रियां घरों में अपना धन, वस्त्र आदि छिपा कर रखती हैं.

दूसरों के दोष देखने वाले पिशाचों को भस्म कर दो

हे अग्नि देव! आप इन राक्षसों और दूसरों के दोष देखने वाले पिशाचों को भस्म कर दो. हे काले मार्ग वाले अग्नि ! दूसरों के प्रतिकूल आचरण करने वाली राक्षसियों को भी आप भस्म कर दें.

पेट में रुका हुआ मूत्र बाहर निकल कर पृथ्वी पर गिरे

हम सैकड़ों सामथ्यर्थों वाले एवं बाण के पिता मित्र अर्थात् सूर्य को जानते हैं. हे रोगी मनुष्य! इसी बाण से मैं तेरे मूत्रादि रोगों को नष्ट करता हूं. तेरे पेट में रुका हुआ मूत्र बाहर निकल कर पृथ्वी पर गिरे.

अपने राष्ट्र का स्वामी एवं शत्रुओं को वश में करने वाला बनूं

हे मणि! में तुम्हारे प्रभाव से शत्रुओं का नाशक, प्रजाओं का पालक, अपने राष्ट्र का स्वामी एवं शत्रुओं को वश में करने वाला बनूं, मैं शत्रु सेना के वीरों एवं उन की प्रजाओं पर शासन करने में समर्थ बनूं.

सुखपूर्वक प्रसव के लिए संधि बंध शिथिल हो जाएं

हे पूषा देव! सुख उत्पन्न करने वाले इस यज्ञ कर्म में प्राणि समूह के प्रेरक देव अर्यमा होता बन कर आप को हवि प्रदान करें. संपूर्ण जगत् के निर्माता वेधा देव आप को वषट्‌कार के द्वारा हवि प्रदान करें, आप की कृपा से यह गर्भिणी नारी प्रसव संबंधी कष्ट से छुटकारा पा कर जीवित संतान को जन्म दे. सुखपूर्वक प्रसव के लिए इस के संधि बंध शिथिल हो जाएं.

पृथ्वी के ऊपर विस्तृत असीमित पाप से बचाओ

हे मणि! हमें स्वर्ग की जड़ के समान विस्तृत एवं पृथ्वी के ऊपर विस्तृत असीमित पाप से बचाओ और सभी प्रकार से हमारी रक्षा करो.

उन्नति के मार्ग में विघ्न डालने वाले पाप भी हमें न पा सकें

हे सोम देव! हमारा शत्रु अपने स्थान से भागा हुआ होने के कारण कभी भी अपनी स्त्री के पास न पहुंच सके. हे मरुत् देव! इस यज्ञ में आप हमारी रक्षा करें, सामने से आता हुआ तेजस्वी शत्रु मुझे प्राप्त न कर सके, कीर्ति और उन्नति के मार्ग में विघ्न डालने वाले पाप भी हमें न पा सकें.

जल हमारे यज्ञ को फल देने में समर्थ बनाए

जो जल सूर्य मंडल में स्थित है अथवा सूर्य जिस जल के साथ स्थित है, वह जल हमारे यज्ञ को फल देने में समर्थ बनाए.

यह जंगिड़ मणि हमें पाप से बचाए, समस्त रोगों की ओषधि है

जंगिड़ वृक्ष से निर्मित यह मणि दूसरों को पराजित करती है, कृत्या आदि भक्षकों को नष्ट करती है तथा समस्त रोगों की ओषधि है. यह जंगिड़ मणि हमें पाप से बचाए.

वृद्धावस्था तक नीरोग रह कर जीवन बिताने योग्य बनाता हूं

हे रोगी पुरुष! में तुझे पूर्व आदि दिशाओं के मध्य वृद्धावस्था तक नीरोग रह कर जीवन बिताने योग्य बनाता हूं. तेरा राजयक्ष्मा आदि रोग एवं पाप देवता निर्मित रोग तुझ से दूर चले जाएं. इसी प्रकार मैं तुझे क्षय, कोढ़ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से एवं वरुण देव के पापों से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

रोगों के कारण होने वाले शरीर के पीले रंग से छूट जाए

हे व्याधिग्रस्त पुरुष! तेरी दीर्घायु के लिए हम तुझे गाय के समान लाल रंग से ढकते हैं. यह पुरुष पापरहित हो कर कामला आदि रोगों के कारण होने वाले शरीर के पीले रंग से छूट जाए.

हम मंत्र रूपी वाणी से बुरे लक्षणों का विनाश करते हैं

हे पुरुष! तेरे अपने शरीर, केशों एवं नेत्रों के जो बुरे लक्षण हैं, हम मंत्र रूपी वाणी से उन सभी बुरे लक्षणों का विनाश करते हैं. सविता देव तुझे कल्याण की प्रेरणा दें.

उपद्रवकारियों को वश में कर के अनेक प्रकार से दंडित करो

हे बृहस्पति आदि देवो! आप की स्तुति करता हुआ जो यह मनुष्य आप की शरण में आया है, यह हमारा विरोधी शत्रु है. हे बृहस्पति, अग्नि एवं सोम ! इन उपद्रवकारियों को वश में कर के अनेक प्रकार से दंडित करो.

जो बाल श्वेत हो गए हैं, उन्हें भी अपने रंग में रंग दो

हे हरिद्रा ! हलदी नामक ओषधि! तू रात में उत्पन्न हुई है. इसलिए तू शरीर की सफेदी दूर करने में समर्थ है. हे भृंगराज (भागरा) नामक ओषधि ! रंग काला कर देने वाली इंद्रावारुणि नामक ओषधि ! एवं असित वर्ण करने वाली नील नामक ओषधि ! तुम कुष्ठ रोग के कारण विकृत रंग वाले इस अंग को अपने रंग में रंग दो. वृद्धावस्था के कारण जो बाल श्वेत हो गए हैं, उन्हें भी अपने रंग में रंग दो.

सौ वर्ष की आयु पाने के लिए तुझे बांधता हूं

हे यजमान ! दक्ष की संतान महर्षियों ने सौमनस्य को प्राप्त हो कर राजा शतानीक के लिए जिस निर्दोष स्वर्ण को बांधा था, वही स्वर्ण में तेरी दीर्घ आयु, तेज, बल, एवं सौ वर्ष की आयु पाने के लिए तुझे बांधता हूं.

लाल रंग के रूप और यौवन को ले कर, हम तुझे ढकते हैं

देवों की जो लाल रंग की कामधेनु आदि गाएं एवं मनुष्यों की जो लाल रंग की गाएं हैं, इन दोनों प्रकार के लाल रंग के रूप और यौवन को ले कर, हे रोगी पुरुष! हम तुझे ढकते हैं.

तिल की मंजरी से निर्मित मणि तेरा रोग दूर करे

मटमैले वर्ण के अर्जुन वृक्ष के काठ से, जी की भूसी से एवं तिल की मंजरी से निर्मित मणि तेरा रोग दूर करे. क्षेत्रीय व्याधियों, अतिसार, यक्ष्मा आदि का विनाश करने वाली ओषधि समस्त रोगों को दूर करे.

जो मनुष्य हमें दास बनाना चाहता है, उन अमित्रों को

हमारी जाति का अधिक बली, शत्रु समान शक्ति वाला अथवा निकृष्ट बलशाली जो मनुष्य हमें दास बनाना चाहता है, हमारे उन अमित्रों को, सब को रुलाने वाले संहार कर्ता देव रुद्र अपने बाणों से बींध डालें.

रोग को त्याग दिया है एवं सुख प्राप्त कर लिया है

हे रोगी पुरुष! तूने शत्रु के समान बाधा पहुंचाने वाले रोग को त्याग दिया है एवं सुख प्राप्त कर लिया है. उत्तम कर्मों के फल के रूप में प्राप्त होने वाले इस कल्याणमय भूलोक में तू स्थित है. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कोढ़, आदि से, रोग का कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, देव, गुरु आदि के द्रोह से एवं वरुण देव के पाप से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

तू यक्ष्मा रोग से छूट गया है

हे रोगी पुरुष! तू यक्ष्मा रोग से छूट गया है. रोग के कारण बने हुए पाप से, निंदा से, द्रोह से, वरुण के पाप से तू छूट गया है. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कोढ़ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से तथा वरुण देव के पाप से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

वृद्धावस्था तक नीरोग रह कर जीवन बिताने योग्य बनाता हूं

हे रोगी पुरुष! में तुझे पूर्व आदि दिशाओं के मध्य वृद्धावस्था तक नीरोग रह कर जीवन बिताने योग्य बनाता हूं. तेरा राजयक्ष्मा आदि रोग एवं पाप देवता निर्मित रोग तुझ से दूर चले जाएं. इसी प्रकार मैं तुझे क्षय, कोढ़ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से एवं वरुण देव के पापों से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

मैं अपने मंत्र के द्वारा तुझे पाप रहित बनाता हूं

हे रोगी पुरुष! ये दिव्य एवं वायु पत्नी पूर्व आदि चारों दिशाएं एवं सब के प्रेरक सविता सभी प्रकार तुम्हें सुखी करें. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कुष्ठ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से तथा वरुण देव के पापों से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र के द्वारा तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.