वेदशास्त्र धारण करने की मुझे बुद्धि दीजिए

हे वाणी के स्वामी ब्रह्म देव! आप दिव्य मन के साथ मेरे समीप आइए. हे प्राण के स्वामी ब्रह्म! इच्छित फल दे कर मुझे आनंदित कीजिए. मेरे द्वारा अध्ययन किए गए वेदशास्त्र धारण करने की मुझे बुद्धि दीजिए.

प्रसन्न हो जाओ एवं हमें मनचाहा फल प्रदान करो

हे परम ऐश्वर्य वाले इंद्र ! तुम हम पर प्रसन्न हो जाओ एवं हमें मनचाहा फल प्रदान करो. हे शूर इंद्र! अपने घोड़ों की सहायता से तुम मेरे यज्ञ में आओ तथा इस यज्ञ में निचोड़े गए सोमरस को पियो. यह सोमरस प्रशंसनीय एवं मधुर है. पीने पर यह सोमरस तृप्ति और उत्तम मादकता का कारण बनता है.

ज्ञान होने के पश्चात तत्त्व ज्ञानी कहता है

ज्ञान होने के पश्चात तत्त्व ज्ञानी कहता है, "मैं ने तत्त्व ज्ञान होते ही द्यावा और पृथ्वी को सभी ओर से प्राप्त कर लिया है तथा में ही ब्रह्म से प्रथम उत्पन्न प्राणी एवं भौतिक पदार्थ हूं. जिस प्रकार वक्ता के समीपवर्ती जन वाणी को तत्काल सुन और समझ लेते हैं, उसी प्रकार यह परमात्मा संसार में स्थित, सब के पोषण का इच्छुक एवं वैश्वानर के रूप में सब का पोषक है."

अपने अत्यधिक कल्याणकारी रस का हमें अधिकारी बनाएं

जिस प्रकार माताएं अपनी इच्छा से दूध पिला कर बालकों को पुष्ट करती हैं, उसी प्रकार हे जल! आप अपने अत्यधिक कल्याणकारी रस का हमें अधिकारी बनाएं.

पर्याप्त रूप में आ कर हमें तृप्त करें

हे जल! हम जिस अन्न आदि को पा कर तृप्त होते हैं, उसे प्राप्त करने के लिए हम आप को पर्याप्त रूप में पाएं. हे जल! आप पर्याप्त रूप में आ कर हमें तृप्त करें.

जो शत्रु हैं, वे हमें प्राप्त न कर सकें

अस्त्रशस्त्र आदि से ताड़ित करने वाले जो शत्रु हैं, वे हमें प्राप्त न कर सकें, सामने आ कर हिंसा करने वाले हमें न पा सकें. हे परम ऐश्वर्य ऐश्वर्य संपन्न इंद्र देव ! शत्रुओं द्वारा बारबार छोड़े गए अनेक प्रकार के मुखों वाले जो बाण हैं, उन्हें हम से दूर स्थान में गिराओ.

आनंद स्वरूप ब्रह्म के साक्षात्कार का सामर्थ्य दें

हे जल! आप सभी प्रकार का सुख देने वाले हैं. अन्न आदि सुखों का उपभोग करने के इच्छुक हम सब को आप उन के उपभोग की शक्ति प्रदान करें. आप हमें महान एवं रमणीय आनंद स्वरूप ब्रह्म के साक्षात्कार का सामर्थ्य दें.

सीसे के द्वारा सभी राक्षसों को पराजित करता हूं

यह सीसा राक्षस, पिशाच आदि द्वारा डाले जाने वाले विघ्नों को समाप्त करने वाला है. यह मनुष्यों का भक्षण करने वाले राक्षसों को नष्ट करता है. में इस सीसे के द्वारा सभी राक्षसों को पराजित करता हूं. वे राक्षस पिशाची से उत्पन्न हैं.

जलाशय का जल बाहर निकालने के लिए नाली खोदते हैं

हे मूत्र व्याधि से पीड़ित रोगी! मैं तेरे मूत्र निकलने के मार्ग का उसी प्रकार भेदन करता हूं, जिस प्रकार जलाशय का जल बाहर निकालने के लिए नाली खोदते हैं. तेरा सारा मूत्र शब्द करता हुआ बाहर निकले.

शरीर में वर्तमान सभी बुरे लक्षणों को निकाल दें

सब को प्रेरणा देने वाले सविता देव, वरुण देव, मित्र एवं अर्थमा देव हमारे हाथों और पैरों में स्थित असौभाग्य सूचक लक्षणों को दूर कर दें. अनुमति देवी, 'भय मत करो', कहती हुई हमारे शरीर में वर्तमान सभी बुरे लक्षणों को निकाल दें. इंद्र आदि देवों ने इस अनुमति देवी को हमें सौभाग्य देने के लिए प्रेरित किया है.

अपने राष्ट्र का स्वामी एवं शत्रुओं को वश में करने वाला बनूं

हे मणि! में तुम्हारे प्रभाव से शत्रुओं का नाशक, प्रजाओं का पालक, अपने राष्ट्र का स्वामी एवं शत्रुओं को वश में करने वाला बनूं, मैं शत्रु सेना के वीरों एवं उन की प्रजाओं पर शासन करने में समर्थ बनूं.

जल की ओषधि के रूप में याचना करता हूं

मैं धनों के स्वामी एवं सुख साधन प्रदान कर के गतिशील मनुष्यों को एक स्थान पर बसाने वाले जल की ओषधि के रूप में याचना करता हूं.

वह रोगों की ओषधि है और उन्हें शांत करने वाली है

बांमी बनाने वाली दीमक पृथ्वी के नीचे स्थित जलराशि से रोग निवारक जड़ीबूटी को उखाड़ती है. वह अतिसार आदि रोगों की ओषधि है और उन्हें शांत करने वाली है.

जलोदर रोग वाले पुरुष को रोगमुक्त करता हूं

इंद्रादि देवों में वरुण पापियों को दंड देने वाले हैं. इस प्रकार के यह वरुण सब से उत्कृष्ट हैं. सभी पदार्थ तेजस्वी वरुण देव के वश में हैं. इसलिए मैं वरुण की स्तुति संबंधी मंत्रों से शक्ति प्राप्त कर के वरुण देव के प्रचंड कोप के कारण उत्पन्न जलोदर रोग वाले इस पुरुष को रोगमुक्त करता हूं.

शत्रु सैनिकों का मन कुछ सोचने और निश्चय करने में समर्थ न हो

शिव के धनुष पिनाक के समान शत्रुओं के मारने में सक्षम आयुध धारण करती हुई, खड्ग आदि आयुधों से शत्रुओं को फाड़ती हुई हमारी सेना मारकाट मचाती हुई आगे बढ़े. यदि शत्रु सेना उस का सामना करने के लिए एकत्र हो, तो शत्रु सैनिकों का मन कुछ सोचने और निश्चय करने में समर्थ न हो. ऐसी स्थिति में हमारे शत्रु राष्ट्र, कोश आदि से रहित हो जाएं.

समस्त कार्यों के द्वारा मधु के समान बन कर सब के प्रेम का पात्र बनूं

हे मधु लता ! तुम्हें धारण करने से मेरा निकट गमन दूसरों को प्रसन्न करने वाला हो तथा मेरा दूर गमन दूसरों को प्रसन्न करे. में वाणी से मधुयुक्त हो कर तथा समस्त कार्यों के द्वारा मधु के समान बन कर सब के प्रेम का पात्र बनूं.

इस अंग को अपने समान रंग वाला अर्थात् काला कर दे

हे ओषधि ! तेरी माता तेरे समान ही काले रंग वाली है. तेरा पिता आकाश भी तेरे ही समान नीले रंग का है. हे नील नामक ओषधि ! तू अपने संपर्क में आने वाले पदार्थ को अपने समान रंग वाला बना देती है. इसलिए कुष्ठ रोग से दूषित इस अंग को अपने समान रंग वाला अर्थात् काला कर दे.

आप सूर्य के समान तेज वाले हैं, आप हमारा विस्तार से कल्याण करें

हे सूर्य द्वारा पृथ्वी से सोखे हुए जल को न गिराने वाले पर्जन्य देव! हे सात गणों वाले मरुत् देव! आप सब सूर्य के समान तेज वाले हैं. आप सब हमारा विस्तार से कल्याण करें.

वह परमात्मा किस प्रकार का है?

वह सूर्यात्मक परमात्मा हमारा पालनकर्ता, जन्मदाता एवं बंधु है. वह स्वर्ग आदि स्थानों एवं वहां प्राप्त होने वाले समस्त प्राणियों को जानता है. एकमात्र वही इंद्र आदि देवों का नाम रखने वाला है अथवा वह स्वयं ही इंद्र आदि नाम धारण करता है. इस प्रकार के परमात्मा को सभी प्राणी यह पूछते हुए प्राप्त होते हैं कि वह परमात्मा किस प्रकार का है?

यह महती ओषधि उस का समूल विनाश करती है

प्राणों का अपहरण करने वाले राक्षस एवं शरीर को निर्बल बनाने वाले रोग विशाल घाव के पकने के स्थान को नीचे से विदीर्ण करते हैं, यह महती ओषधि उस का समूल विनाश करती है तथा अतिसार आदि रोगों को जड़ से मिटा देती है.

शरीर में रखा हुआ मूत्र बाहर निकल कर पृथ्वी पर गिरे

हम सैकड़ों सामर्थों वाले एवं बाण के पिता पर्जन्य अर्थात् बादल को जानते हैं. हे मूत्ररोगी! मैं तेरे मूत्रादि रोगों को समाप्त करता हूं. शरीर में रखा हुआ मूत्र बाहर निकल कर पृथ्वी पर गिरे.

राक्षसों की संतानों के समीप पहुंच कर उन्हें समाप्त कर दो

हे सोमरस पीने वाले अग्नि देव! तुम राक्षसों की संतानों के समीप पहुंच कर उन्हें समाप्त कर दो और हमारी संतान की रक्षा करो. हमारे जो शत्रु तुम से भयभीत हो कर तुम्हारी प्रार्थना करते हैं, तुम उन की दाईं और बाईं दोनों आंखें बाहर निकाल लो.

वे इस कार्य में हमें स्वर्ण, रजत आदि धन दें

हे धन देने वाले देव कुबेर! मैं अपने अभिमत धन आदि प्राप्त करने के लिए हवि से इंद्र आदि देवों की प्रसन्नता के लिए हवन करता हूं. दिशाओं की रक्षा करने वाले इंद्र आदि देवों में जो चौथे देव कुबेर हैं, वे इस यज्ञ में हमें स्वर्ण, रजत आदि धन दें.

हमें इच्छित फल देने वाले पुरुष के निवास स्थान तक पहुंचाओ

हे चलने के इच्छुक व्यक्ति के चरणो ! तुम आगे बढ़ो एवं शीघ्र चलने के लिए गति करो. तुम हमें इच्छित फल देने वाले पुरुष के निवास स्थान तक पहुंचाओ, किसी से पराजित न होने वाले इंद्र की पत्नी हमारी सेना की देवता हैं. वह हमारी सेना की रक्षा के लिए आगे आगे चलें.

माता और पुत्र को अलग-अलग करता हूं

हे गर्भिणी! मैं गर्भस्थ बालक को बाहर निकालने के लिए मूत्रमार्ग को फैलाता हूं तथा योनि के आसपास की नाड़ियों को भी फैलाता हूं. क्योंकि ये प्रसव में बाधा डालती हैं. में माता और पुत्र को अलग-अलग करता हूं. इस के बाद में पुत्र को जरायु से अलग करता हूं. जरायु गर्भाशय से नीचे गिर जाए.

रोग को त्याग दिया है एवं सुख प्राप्त कर लिया है

हे रोगी पुरुष! तूने शत्रु के समान बाधा पहुंचाने वाले रोग को त्याग दिया है एवं सुख प्राप्त कर लिया है. उत्तम कर्मों के फल के रूप में प्राप्त होने वाले इस कल्याणमय भूलोक में तू स्थित है. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कोढ़, आदि से, रोग का कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, देव, गुरु आदि के द्रोह से एवं वरुण देव के पाप से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

तू यक्ष्मा रोग से छूट गया है

हे रोगी पुरुष! तू यक्ष्मा रोग से छूट गया है. रोग के कारण बने हुए पाप से, निंदा से, द्रोह से, वरुण के पाप से तू छूट गया है. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कोढ़ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से तथा वरुण देव के पाप से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

वृद्धावस्था तक नीरोग रह कर जीवन बिताने योग्य बनाता हूं

हे रोगी पुरुष! में तुझे पूर्व आदि दिशाओं के मध्य वृद्धावस्था तक नीरोग रह कर जीवन बिताने योग्य बनाता हूं. तेरा राजयक्ष्मा आदि रोग एवं पाप देवता निर्मित रोग तुझ से दूर चले जाएं. इसी प्रकार मैं तुझे क्षय, कोढ़ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से एवं वरुण देव के पापों से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र से तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.

मैं अपने मंत्र के द्वारा तुझे पाप रहित बनाता हूं

हे रोगी पुरुष! ये दिव्य एवं वायु पत्नी पूर्व आदि चारों दिशाएं एवं सब के प्रेरक सविता सभी प्रकार तुम्हें सुखी करें. इसी प्रकार में तुझे क्षय, कुष्ठ आदि से, रोग के कारण बने हुए पाप देवता से, बांधवों के आक्रोश से उत्पन्न पाप से, गुरु, देव आदि के द्रोह से तथा वरुण देव के पापों से छुड़ाता हूं. मैं अपने मंत्र के द्वारा तुझे पाप रहित बनाता हूं. द्यावा और पृथ्वी दोनों तेरे लिए कल्याणकारी हों.